हे ब्रो! मैं एक मिलेनियल हूँ, और हिंदी मेरी पहली भाषा है

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हे ब्रो! मैं एक मिलेनियल हूँ, और हिंदी मेरी पहली भाषा है

Illustration: Akshita Monga

ह  बात है 1999 की। स्कूल का पहला दिन था और मैं घर की याद में क्लास के एक कोने में बैठा था। अपने अकेलेपन में डूबे हुए मुझे एक बहुत ज़रूरी ख़्याल आया – “मुझे बाथरूम जाना है”। इस ख़्याल को ऐसे का ऐसा मैंने अपनी क्लास टीचर के सामने रख दिया। मैंने सोचा नहीं था कि स्कूल के पहले दिन की मनहूसियत पर मैं चार चाँद लगा चुका हूँ। टीचर ने बताया “May I go to toilet?”, यह वे जादुई शब्द हैं जिन्हें बोले बिना मुझे मुक्त होने की इजाज़त नहीं थी। और यही शुरुआत थी, एक ऐसी जंग की जो मैं आज भी लड़ रहा हूँ। जंग, जो एक भाषा और मेरे बीच है।

मेरा जन्म एक हिंदी भाषी घर में हुआ, जहाँ अंग्रेज़ी का प्रयोग दिन में बस दो बार होता है: “Good Morning” और  “Good Night”। दादाजी ने अंग्रेज़ों का राज देखा था और माँ-बाप ने white-collar बॉस का। इसलिए जब स्कूल चुनने की बारी आयी, तब अपनी अपेक्षाओं को मेरे बैग में पैक करते हुए सबने बोला, “English-medium, please.”

पर स्कूल में मेरी हिंदी मीडियम परवरिश मेरे साथ रहती थी। इसलिए बहुत कोशिश करने के बावजूद, दिमाग़ में “eraser” से पहले “रब्बड़” और “scale” से पहले फ़ुट्टा आता था। लेकिन टीचर के दंड और निर्दयी फ़ाइन से बचने के लिए, अधिकतर हिंदी भाषियों की तरह मैंने भी अपने दिमाग़ में एक हिंदी-इंग्लिश ट्रांसलेटर डाउनलोड कर लिया। यह लिखते समय तो बहुत अच्छा चलता था, पर बोलते समय पता नहीं क्यों अटक जाता था?

अब क्योंकि यह भरोसेमंद नही था इसलिए इंग्लिश का प्रयोग कब करना है, इसके लिए दिमाग़ में एक अलग एमर्जेन्सी कम्पार्टमेंट बना दिया। जैसे क्लास में अगर इतराते हुए लड़की ने “How are you?” पूछ लिया या टीचर ने गुर्राते हुए होमवर्क मांग लिया, तो no choice but to reply in English. और अगर यही सवाल गलियाते हुए दोस्त ने पूछ लिया, तो इंग्लिश कम्पार्टमेंट का शटर डाउन कर के बोल दिया – “अंग्रेज़ी मत झाड़”।

ज़िन्दगी इन सब पैंतरों की वजह से ठीक चल रही थी। लेकिन 2002 की सर्दियों में सब बदल गया।

Blue नाम के चार लड़कों के बैंड ने एक गाना गाया: “One Love”. रातों रात यह गाना सबकी ज़ुबान पर था। सिवा मेरे। अचानक मुझे एहसास हुआ कि मैं कितना uncool हूँ। अंग्रेज़ी गाने मैंने सुने नहीं थे और अंग्रेज़ी फ़िल्म (बिना हिंदी डब्बिंग) मैंने सिर्फ़ एक देखी थी। Titanic। मैं Gryffindor के ज़माने में गरुड़द्वार था। और अब इस शर्मनाक स्थिति से बाहर निकलने का वक़्त आ गया था।

मुझे एहसास हुआ कि मेरे लिए यह भाषा सीखना मुश्किल शायद इसलिए था क्योंकि मैं हमेशा इससे अलग माहौल में रहा हूँ। अगर मेरे दोस्त “और भाई” के बजाय “Hey Bro” बोलते, या मेरी माँ भुट्टे के बजाय बेबी कॉर्न ख़रीदती, तो मेरे लिए यह काम शायद इतना मुश्किल न होता।  

पर क्या मैं उस माहौल को ख़ुद बना सकता था? शायद।

पर इससे पहले कि मैं सोचता क्या लिखना है, मेरे सामने उससे बड़ा सवाल आ के खड़ा हो जाता: तुझे हिंदी लेखक बनना है या English writer?

आपकी अदालत  की जगह The Newshour ने ले ली और कोई मिल गया  को E.T. ने रिप्लेस कर दिया। मैंने फ़ोन में WhatsApp forward से ज़्यादा Dictionary को पढ़ना शुरू  कर दिया। और जो समय Orkut पर testimonial लिखते हुए निकलता था, वह अब किसी आसान अंग्रेज़ी नॉवल के साथ गुज़रने लगा।   

एक sports film के montage की तरह, मैं धीरे-धीरे अंग्रेज़ी में बेहतर हो गया। Monolingual स्पीकर से मेरा प्रमोशन bilingual में हो गया। और इसका फ़ायदा मुझे एग्ज़ाम से लेकर इंटरव्यूज़ तक, हर जगह मिला। नुक़्सान हुआ तो बस एक। वही, जो धोबी के कुत्ते का हुआ था।  

ज़्यादा सोचने की मुझे बचपन से बीमारी थी, इसलिए लेखक बनना उतना ही obvious था जितना अमीर बाप के बेटे के लिए #wanderlust. पर इससे पहले कि मैं सोचता क्या लिखना है, मेरे सामने उससे बड़ा सवाल आ के खड़ा हो जाता : तुझे हिंदी लेखक बनना है या English writer?

इसका जवाब बहुत आसान था : मैं दोनों ही नहीं बन सकता। मेरी दोनों भाषाओं की जानकारी उतनी ही सीमित थी जितनी RSS शाखा में feminism की। न मेरे पास प्रेमचंद जैसे शब्द थे और न Hemingway जैसे words।

इसलिए मैं उन दोनों की नाजायज़ औलाद बन गया: एक bilingual लेखक। यह फ़ैसला मेरे लिए बहुत मुश्किल था। ऐसे लेखकों को न तो साहित्य अकादेमी सम्मान मिलता है और न ही पुलित्ज़र प्राइज़। पर फिर याद आया, वह तो मुझे वैसे भी नहीं मिल सकता।

लेकिन इन सब बातों से अहम सवाल यह है, क्या अब, फ़ाइनली, मैं “cool” बन गया?

आज मैं समझता हूँ कि cool अंग्रेज़ी बोलना नहीं, बल्कि अपनी ज़िन्दगी को वैसे जीना है जैसे हम हैं। और अगर मैं “Hey Bro” की बजाय “और भाई” बोलता भी हूँ तो उसमें कुछ शर्मिन्दा होने वाली बात नहीं है। क्योंकि मेरे मुँह से निकला “Hey Bro” आज भी उतना ही नकली लगता है, जितना Thugs of Hindostan का VFX.

वह अंग्रेज़ी वाला कम्पार्टमेंट आज भी मेरे दिमाग़ में है, बस थोड़ा बड़ा हो गया है। मैं उसकी तरफ़ आज भी तभी जाता हूँ जब कोई और रास्ता न हो। मेरी क्लास टीचर सही थी। सही सवाल  “May I go to toilet?” ही है, क्योंकि “मुझे मूत्रविस…” नहीं नहीं, मुझे हिंदी से इतना भी प्रेम नहीं है।

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